Madhyamik Darshan Ka Shunyavad (माध्यमिक दर्शन का शून्यवाद)
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Prof. Bhagchandra Jain - Hindi & Sanskrit
Madhyamik Darshan Ka Shunyavad (माध्यमिक दर्शन का शून्यवाद)
माध्यमिक दर्शन का शून्यवाद (Madhyamik Darshan Ka Shunyavad) माध्यमिक दर्शन का शून्यवाद आध्यात्मिक और दार्शनिक एवं बौद्ध दर्शन दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। शून्यवाद माध्यमिक दर्शन का एक विशिष्ट प्रभाविक सिद्धान्त रहा है जिसके बीज पालि त्रिपिटक में उपलब्ध होते हैं। हीनयान सम्प्रदाय में उसे पुद्गल नैरात्म्य कहा गया है। महायान दर्शन में धर्मनैरात्म्य की कल्पना का विस्तार हुआ और फलतः शून्यवाद की स्थापना हुई। सौत्रान्तिक दर्शन में बाह्य पदार्थों का प्रत्यक्षतः ज्ञेय नहीं माना गया। विज्ञानवाद में उनकी सत्ता चित्तमात्र के रूप में स्वीकृत हुई। परन्तु माध्यमिक दर्शन में बाह्य और आन्तरिक दोनों प्रकार के पदार्थों का अस्तित्व अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने पदार्थों को न सत् माना और न असत् और न ही अनुभय माना बल्कि उसे चतुष्कोटियों से विनिर्मुक्त कहा। इसलिए उसे अभावात्मक न कहकर निरपेक्ष होने के कारण शून्यात्मक स्वीकार किया।
Author : Prof. Bhagchandra Jain
Publisher : Bharatiya Books
Language : Hindi & Sanskrit
Edition : 2023
Pages : 192
Cover : Hard Cover
ISBN : 978-93-92974-04-5
Size : 14 x 3 x 22 9 l x w x h )
Weight : 380gm
Item Code : TBVP 0084